छात्र प्रदर्शनों पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, पुलिस और सरकार को क्यों दी ‘अहिंसा’ की सीख?

Why Did the Supreme Court Urge ‘Non-Violence’ in Student Protests? Big Message for Police and Govt
छात्र प्रदर्शनों में पुलिस की कार्रवाई को लेकर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन यह कार्य यथासंभव अहिंसक तरीके से किया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिसकर्मी भी इंसान हैं, इसलिए उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक सुरक्षात्मक उपकरण उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन नागरिकों का अधिकार है, वहीं कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। ऐसे में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार और प्रशासन की अहम जिम्मेदारी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने अदालत में दलील दी कि यह याचिका विशेष रूप से प्रदर्शनकारियों पर मेटैलिक काइनेटिक पेलेट्स (Metallic Kinetic Pellets) के इस्तेमाल के खिलाफ दायर की गई है। उनका कहना था कि ऐसे हथियार गंभीर चोट पहुंचा सकते हैं और भीड़ नियंत्रण के लिए इनका उपयोग मानवाधिकारों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस को बल प्रयोग अंतिम विकल्प के रूप में ही करना चाहिए और प्राथमिकता हमेशा अहिंसक तरीकों को दी जानी चाहिए। हालांकि अदालत ने यह भी माना कि कई बार प्रदर्शन हिंसक रूप ले सकते हैं, ऐसे में पुलिसकर्मियों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसलिए सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पुलिस के पास पर्याप्त हेलमेट, बॉडी प्रोटेक्टर, शील्ड और अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध हों, ताकि बिना अनावश्यक बल प्रयोग के स्थिति को नियंत्रित किया जा सके। अदालत की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब विभिन्न राज्यों में छात्र आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर लगातार बहस जारी है। मामले की अगली सुनवाई में अदालत इस विषय पर विस्तृत दिशा-निर्देशों और सरकार के जवाब पर विचार करेगी।
About the Author: Gia Rana
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