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रविवार, 8 नवंबर 2026
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Bhai Dooj 2026: भाई दूज पर बहनें क्यों लगाती हैं भाई को तिलक? जानें इस परंपरा का खास महत्व

नई दिल्ली|Manuj
Bhai Dooj 2026: भाई दूज पर बहनें क्यों लगाती हैं भाई को तिलक? जानें इस परंपरा का खास महत्व

📸 सांकेतिक तस्वीर | फोटो: दैनिक सबसे तेज़

दिवाली के बाद आने वाला भाई दूज का त्योहार भाई-बहन के रिश्ते को और मजबूत बनाने का खास अवसर होता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं। वहीं भाई भी अपनी बहनों को उपहार देकर हमेशा साथ निभाने का वादा करते हैं।साल 2026 में भाई दूज का त्योहार 11 नवंबर, बुधवार को मनाया जाएगा। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इसे यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। भाई दूज पर तिलक लगाने की परंपरा क्यों है खास?भाई दूज पर तिलक लगाने की परंपरा के पीछे धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है। मान्यता है कि इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे थे। यमुना ने उनका स्वागत किया और माथे पर तिलक लगाकर उनके सुखी जीवन की कामना की।इससे प्रसन्न होकर यमराज ने अपनी बहन को वरदान दिया। तभी से भाई दूज पर बहनों द्वारा भाइयों को तिलक लगाने की परंपरा शुरू होने की मान्यता है।भाई दूज 2026 शुभ मुहूर्त और तिलक का समयइस साल भाई दूज पर बहनें दोपहर के समय अपने भाइयों को तिलक लगा सकती हैं।त्योहार की तारीख: 11 नवंबर 2026, बुधवारद्वितीया तिथि शुरू: 10 नवंबर, दोपहर 2:00 बजेद्वितीया तिथि समाप्त: 11 नवंबर, दोपहर 3:53 बजेतिलक का शुभ समय: दोपहर 1:10 बजे से 3:20 बजे तकयह मुहूर्त नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार है। स्थानीय समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। भाई दूज पर क्या करें?इस दिन सुबह स्नान करके पूजा की तैयारी करें। पूजा की थाली में रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई और नारियल रखें। शुभ मुहूर्त में भाई को तिलक लगाकर आरती करें और मिठाई खिलाएं। इसके बाद भाई अपनी बहन को उपहार देकर इस खास रिश्ते को और यादगार बना सकता है।भाई दूज का त्योहार सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि प्यार, विश्वास और परिवार के साथ को मजबूत करने का संदेश भी देता है।

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Diwali Lakshmi Ganesh Puja: दीपावली पर मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा का क्या है महत्व?

नई दिल्ली|Manuj
Diwali Lakshmi Ganesh Puja: दीपावली पर मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा का क्या है महत्व?

Diwali Puja Significance: दीपावली का त्योहार आते ही घरों में पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। बाजारों में दीपक, मिठाइयां और पूजा सामग्री की खरीदारी बढ़ जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दिवाली के दिन मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा क्यों की जाती है?धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी धन, वैभव और समृद्धि की देवी हैं, जबकि भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और शुभ कार्यों का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण दीपावली पर दोनों की पूजा का विशेष महत्व है।मां लक्ष्मी की पूजा से जुड़ी मान्यताहिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को सुख-समृद्धि और धन की देवी माना गया है। दीपावली की रात लोग अपने घरों में लक्ष्मी पूजन करते हैं। मान्यता है कि मां लक्ष्मी की कृपा से जीवन में आर्थिक सुख और खुशहाली आती है।दिवाली से पहले घरों की साफ-सफाई करने की परंपरा भी प्रचलित है। ऐसा माना जाता है कि स्वच्छ और सुंदर घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है।गणेश जी की पूजा क्यों जरूरी मानी जाती है?भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश जी की पूजा से करने की परंपरा है। दीपावली पर मां लक्ष्मी के साथ गणेश जी की पूजा करने का उद्देश्य जीवन में समृद्धि के साथ बुद्धि और शुभता की कामना करना है।दिवाली पर पूजा और खुशियों का संगमदीपावली पर परिवार के सभी सदस्य एक साथ पूजा करते हैं। दीपक जलाकर घर को रोशन किया जाता है और मिठाइयां बांटकर खुशियां साझा की जाती हैं।दिवाली का वास्तविक संदेश केवल धन और वैभव तक सीमित नहीं है। यह पर्व हमें अच्छे विचारों, आपसी प्रेम, सद्भाव और सकारात्मकता के साथ जीवन जीने की प्रेरणा भी देता है।

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राहुल गांधी की चुनौती पर PM मोदी की चुप्पी? 48 घंटे बाद भी देश को इंतजार, क्या होगी आमने-सामने की बहस

नई दिल्ली|Manuj
राहुल गांधी की चुनौती पर PM मोदी की चुप्पी? 48 घंटे बाद भी देश को इंतजार, क्या होगी आमने-सामने की बहस

Rahul Gandhi Debate Challenge: देश की राजनीति में इन दिनों राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच संभावित खुली बहस को लेकर चर्चा तेज है। राहुल गांधी ने पीएम मोदी को डिबेट के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन इस निमंत्रण को 48 घंटे से ज्यादा का समय बीत चुका है। अब सवाल उठने लगा है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस चुनौती को स्वीकार करेंगे?क्या देश को मिलेगी दोनों नेताओं की सीधी बहस?राहुल गांधी की ओर से दिए गए डिबेट के निमंत्रण ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री से जवाब की उम्मीद कर रही है। वहीं, जनता के बीच भी यह सवाल चर्चा का विषय बन रहा है कि क्या देश के दो बड़े राजनीतिक चेहरों को एक मंच पर आमने-सामने देखा जा सकेगा?अगर यह बहस होती है, तो बेरोजगारी, महंगाई, लोकतंत्र और देश के भविष्य जैसे मुद्दों पर दोनों नेताओं के विचार सीधे जनता के सामने आ सकते हैं।अब पीएम मोदी के जवाब का इंतजारराहुल गांधी के निमंत्रण के बाद बीते 48 घंटे से अधिक समय ने इस सवाल को और दिलचस्प बना दिया है। क्या पीएम मोदी इस चुनौती को स्वीकार कर राजनीतिक बहस को नया मोड़ देंगे? या फिर राहुल गांधी का यह आमंत्रण बिना जवाब के ही रह जाएगा?अब देखना होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

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वोट की लड़ाई अब गांवों तक पहुंचेगी! पंचकूला में कांग्रेस ने खोला ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान का मोर्चा

पंचकूला|Manuj
वोट की लड़ाई अब गांवों तक पहुंचेगी! पंचकूला में कांग्रेस ने खोला ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान का मोर्चा

पंचकूला: वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रही है। पंचकूला के बिश्नोई भवन में ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ चौपाल कार्यक्रम एवं जनसंपर्क अभियान को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने मतदाता अधिकारों की रक्षा के लिए अभियान तेज करने का ऐलान किया।प्रेस वार्ता को पंचकूला प्रभारी एवं असंध के पूर्व विधायक शमशेर सिंह गोगी ने संबोधित किया। इस दौरान पंचकूला विधायक चंद्र मोहन, कालका के पूर्व विधायक प्रदीप चौधरी, जिला कांग्रेस अध्यक्ष संजय चौहान और सुधा भारद्वाज भी मौजूद रहे।शमशेर सिंह गोगी ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए हर नागरिक के वोट की सुरक्षा बेहद जरूरी है। कांग्रेस गांव-गांव चौपाल लगाकर जनता को मताधिकार और निष्पक्ष चुनाव के प्रति जागरूक करेगी।अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के दिशा-निर्देशों के तहत 4 से 25 नवंबर तक अभियान के तीसरे चरण में मतदाता सत्यापन और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित होंगे। कांग्रेस ने कार्यकर्ताओं से इस मुहिम को जन-जन तक पहुंचाने की अपील की।अब सवाल यह है कि वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस की यह मुहिम हरियाणा की राजनीति में कितना बड़ा असर छोड़ेगी?

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दिल्ली की ‘वोट चोरी’ महारैली में उमड़ा जनसैलाब, मोनिका डुमरा ने मोदी सरकार पर बोला तीखा हमला

नई दिल्ली|Manuj
दिल्ली की ‘वोट चोरी’ महारैली में उमड़ा जनसैलाब, मोनिका डुमरा ने मोदी सरकार पर बोला तीखा हमला

हरियाणा कांग्रेस सोशल मीडिया टीम की चेयरमैन मोनिका डुमरा बोलीं – पुलिस की रोक-टोक भी कार्यकर्ताओं का उत्साह नहीं कर पाई कम, देशभर से दिल्ली पहुंचे कांग्रेस और INDIA गठबंधन के नेता व कार्यकर्ता।नई दिल्ली: दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को आयोजित कांग्रेस और INDIA गठबंधन की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक पहुंचे। इस महारैली को लेकर हरियाणा कांग्रेस सोशल मीडिया टीम की चेयरमैन मोनिका डुमरा ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देशभर से उमड़े जनसमर्थन ने यह दिखा दिया कि लोकतंत्र और मतदान के अधिकार से जुड़े मुद्दों पर लोग अपनी आवाज उठाने के लिए तैयार हैं।मोनिका डुमरा ने आरोप लगाया कि हरियाणा सहित कई स्थानों पर पुलिस द्वारा वाहनों की चेकिंग के नाम पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गाड़ियों और बसों को रोका गया। उन्होंने इसे कार्यकर्ताओं की दिल्ली यात्रा में बाधा डालने की कोशिश बताया। हालांकि, दिल्ली में प्रवेश के दौरान कुछ बसों को वाहन उत्सर्जन मानकों (BS-VI) के तहत जांच के बाद रोके जाने की भी रिपोर्ट सामने आई है।उन्होंने कहा कि तमाम रुकावटों के बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उत्साह और जोश कम नहीं हुआ। कार्यकर्ता हर चुनौती का सामना करते हुए दिल्ली पहुंचे और महारैली में अपनी भागीदारी दर्ज कराई। मोनिका के मुताबिक, कार्यकर्ताओं के इस उत्साह ने सरकार की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।देशभर के प्रमुख विपक्षी नेता हुए शामिलरामलीला मैदान में आयोजित इस महारैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, सोनिया गांधी सहित INDIA गठबंधन के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। इनके अलावा समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव, फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, डी. राजा और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने भी भाग लिया।महारैली में विभिन्न राज्यों से कांग्रेस और INDIA गठबंधन के कार्यकर्ता, युवा, महिला संगठन तथा समर्थक पहुंचे। हजारों की संख्या में लोगों ने दिल्ली में मार्च और रैली में हिस्सा लिया।लोकतंत्र और वोट के अधिकार का मुद्दा उठामहारैली में चुनावी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी के आरोपों को प्रमुखता से उठाया गया। विपक्षी नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की जवाबदेही की मांग की।मोनिका डुमरा ने कहा कि कार्यकर्ताओं का जोश और भागीदारी इस बात का संदेश है कि लोकतंत्र से जुड़े सवालों को लेकर आवाज उठाई जाती रहेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं के संघर्ष और एकजुटता को सराहनीय बताते हुए कहा कि रास्ते में कितनी भी रुकावटें आएं, लोकतांत्रिक अधिकारों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।

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Crypto Market में बड़ा भूचाल! Binance पर साइबर हमला, 52 हजार करोड़ रुपये की क्रिप्टो संपत्ति प्रभावित

नई दिल्ली|Manuj
Crypto Market में बड़ा भूचाल! Binance पर साइबर हमला, 52 हजार करोड़ रुपये की क्रिप्टो संपत्ति प्रभावित

नई दिल्ली: क्रिप्टोकरेंसी बाजार से एक बड़ी खबर सामने आई है। दुनिया के प्रमुख क्रिप्टो एक्सचेंज Binance में साइबर सुरक्षा से जुड़ी बड़ी सेंधमारी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इस घटना में करीब 6.3 अरब डॉलर यानी लगभग 52 हजार करोड़ रुपये की डिजिटल संपत्ति प्रभावित होने का अनुमान है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म पर जमा और निकासी की सेवाओं को अस्थायी रूप से रोक दिया है।इस घटना के बाद क्रिप्टो मार्केट में भी अस्थिरता देखने को मिली है। Bitcoin समेत कई प्रमुख डिजिटल करेंसी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।सुरक्षा जांच के चलते Binance की सेवाओं पर रोकBinance ने साइबर हमले की जानकारी सामने आने के बाद अपने सिस्टम की सुरक्षा जांच शुरू कर दी है। कंपनी ने एहतियात के तौर पर Deposit और Withdrawal की सुविधा अस्थायी रूप से बंद की है। इससे यूजर्स फिलहाल अपने अकाउंट में नई क्रिप्टो जमा करने या मौजूदा डिजिटल संपत्ति निकालने में परेशानी का सामना कर सकते हैं।कंपनी की ओर से बताया गया है कि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और प्रभावित सिस्टम को सुरक्षित बनाने का काम किया जा रहा है।करीब 3 अरब डॉलर की संपत्ति फ्रीज करने का दावाBinance के आधिकारिक अपडेट के अनुसार, प्रभावित डिजिटल संपत्तियों में से करीब 3 अरब डॉलर की संपत्ति को ब्लॉकचेन पार्टनर्स की सहायता से फ्रीज किया गया है। कंपनी ने नुकसान की भरपाई के लिए अपने SAFU फंड और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल करने की बात भी कही है।इस पूरे मामले में साइबर हमले के तरीके और जिम्मेदार लोगों की पहचान करने के लिए जांच जारी है।Bitcoin और दूसरी डिजिटल करेंसी पर असरBinance से जुड़ी इस खबर का असर क्रिप्टो निवेशकों के भरोसे पर भी पड़ा है। बाजार में Bitcoin, Ethereum और BNB जैसी डिजिटल करेंसी में गिरावट देखी गई। निवेशक फिलहाल बाजार की स्थिति और Binance की ओर से आने वाले नए अपडेट पर नजर बनाए हुए हैं।विशेषज्ञों के मुताबिक, बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज पर इस तरह की सुरक्षा घटना डिजिटल करेंसी बाजार में जोखिम को फिर से उजागर करती है।डिजिटल करेंसी में निवेश से पहले सावधानी जरूरीक्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल संपत्ति है, जिसका लेन-देन ब्लॉकचेन तकनीक के माध्यम से होता है। Bitcoin और Ethereum इसके लोकप्रिय उदाहरण हैं। इसमें निवेश के दौरान कीमतों में तेजी और गिरावट के साथ साइबर सुरक्षा का जोखिम भी बना रहता है।Binance की यह घटना एक बार फिर बताती है कि डिजिटल एसेट्स के मामले में मजबूत सुरक्षा व्यवस्था कितनी जरूरी है। अब सभी की नजर कंपनी की जांच रिपोर्ट और सेवाओं की बहाली पर है।

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1 नवंबर को दिल्ली में कांग्रेस की महारैली, रोहतक में BJP की पदयात्रा; तारीख बदलने पर उठे सवाल

नई दिल्ली|Manuj
1 नवंबर को दिल्ली में कांग्रेस की महारैली, रोहतक में BJP की पदयात्रा; तारीख बदलने पर उठे सवाल

रोहतक/नई दिल्ली: हरियाणा की राजनीति में 1 नवंबर को होने वाले दो बड़े आयोजनों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली आयोजित करेगी, जबकि BJP रोहतक में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा निकालेगी।कांग्रेस की महारैली में कथित वोट चोरी, मतदाता सूची में अनियमितताओं और चुनावी पारदर्शिता जैसे मुद्दे उठाए जाने की तैयारी है। हरियाणा कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता रैली में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जुटे हैं।वहीं, रोहतक में BJP की पदयात्रा में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की भागीदारी की संभावना जताई गई है।इस बीच, BJP की पदयात्रा की तारीख 31 अक्टूबर से बदलकर 1 नवंबर किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। हरियाणा कांग्रेस की सोशल मीडिया चेयरपर्सन मोनिका डुमरा ने तारीख में बदलाव को लेकर सवाल किया है। दोनों कार्यक्रम एक ही दिन होने से राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।हालांकि, तारीख बदलने के पीछे कांग्रेस की महारैली को कारण मानने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है। अब 1 नवंबर को होने वाले दोनों आयोजनों और उनमें नेताओं के संदेशों पर सबकी नजर रहेगी।

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रोजगार का सपना नहीं रहेगा अधूरा, अब DIGITAL ORRA करेगा पूरा

पंचकूला, हरियाणा|Vivek
रोजगार का सपना नहीं रहेगा अधूरा, अब DIGITAL ORRA करेगा पूरा

आधुनिकता के इस युग में एक ओर जहां बेरोजगारी और निजीकरण को लेकर लगातार चर्चाएं तेज हैं। वहीं अगर आप काबलियत और कुछ कर गुजरने की चाह रखते हैं तो आपको DIGITAL ORRA देगा नई पहचान। आज के दौर में जब पारंपरिक नौकरियों के अवसर सीमित हो रहे हैं और हर क्षेत्र में डिजिटल क्रांति आ चुकी है, तब खुद को समय के अनुसार ढालना सबसे बड़ी जरूरत बन गया है। केवल डिग्री होने से बात नहीं बनती, बल्कि हाथों में हुनर और आधुनिक डिजिटल स्किल्स होना सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। इसी उद्देश्य के साथ DIGITAL ORRA युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें डिजिटल युग का लीडर तैयार करने के लिए एक बेहतरीन मंच प्रदान कर रहा है।यह संस्थान आज के युवाओं की सबसे बड़ी जरूरत यानी व्यावहारिक ज्ञान पर काम करता है। यहां बच्चों को आज के समय के सबसे डिमांडिंग कोर्सेज सिखाए जाते हैं, जैसे डिजिटल मार्केटिंग, जिसके जरिए आप किसी भी बिजनेस को ऑनलाइन घर बैठे बुलंदियों पर पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा वीडियो एडिटिंग, जो आज की रील्स और यूट्यूब की दुनिया में सबसे ज्यादा मांग वाला और क्रिएटिव हुनर है, और ग्राफिक्स डिजाइनिंग, जिसके माध्यम से विजुअल क्रिएटिविटी के जरिए अपने विचारों को एक आकर्षक रूप दिया जाता है। इसके साथ ही, यहाँ विशेष तौर पर स्किल क्लासेस भी आयोजित की जाती हैं, जो युवाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाती हैं और उन्हें कॉर्पोरेट जगत या फ्रीलांसिंग के लिए पूरी तरह तैयार करती हैं। अगर आप भी अपनी किस्मत के भरोसे बैठने के बजाय अपनी काबिलियत के दम पर आगे बढ़ना चाहते हैं, तो यह सही समय है सही कदम उठाने का। आज ही जुड़ें और अपने सपनों को एक नई डिजिटल दिशा दें!

अंतर्राष्ट्रीय

ट्रंप का सपना चूर-चूर ! फिर नोबेल शांति पुरस्कार से दूर रहे ट्रंप

नई दिल्ली|Vivek
ट्रंप का सपना चूर-चूर ! फिर नोबेल शांति पुरस्कार से दूर रहे ट्रंप

वैश्विक स्तर पर शांति स्थापना, मानवीय अधिकारों की रक्षा और न्याय व्यवस्था को एक नई दिशा देने वाले प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) की घोषणा कर दी गई है। साल 2026 का यह प्रतिष्ठित सम्मान भारतीय तमिल मूल की जानी-मानी मानवाधिकार कार्यकर्ता और पूर्व न्यायाधीश नवनेथम नावी पिल्लई (Navanethem Navi Pillay) को प्रदान किए जाने का आधिकारिक ऐलान किया गया है। नोबेल समिति की ओर से जारी घोषणा के अनुसार, पिल्लई को यह पुरस्कार पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय कानून को धार देने, मानवाधिकारों की रक्षा करने और अन्याय के खिलाफ अडिग रहने के उनके आजीवन संघर्ष के लिए दिया जा रहा है।ट्रंप को फिर हाथ लगी निराशाइस बार के नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर कूटनीतिक गलियारों में काफी चर्चाएं थीं। दुनिया भर के कई राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस बार यह पुरस्कार मिल सकता है, क्योंकि उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय समझौतों और संघर्षों को सुलझाने में अपनी भूमिका का दावा करते हुए इस सम्मान को पाने की इच्छा कई बार सार्वजनिक रूप से जाहिर की थी। हालांकि, नोबेल समिति ने राजनीतिक दांव-पेंच और कूटनीति के बजाय न्याय, कानून के शासन और पीड़ितों के अधिकारों के पक्ष में खड़े होने वाले व्यक्ति को चुनना बेहतर समझा, जिसके चलते ट्रंप को इस बार भी यह प्रतिष्ठित पुरस्कार हासिल नहीं हो सका।दक्षिण अफ्रीका से लेकर अंतरराष्ट्रीय अदालतों तक का सफरदक्षिण अफ्रीका में एक साधारण भारतीय तमिल मूल के परिवार में जन्मीं नावी पिल्लई का शुरुआती जीवन रंगभेद (Apartheid) की कुप्रथा और सामाजिक असमानता के बीच बीता। उन्होंने बेहद संघर्षपूर्ण परिस्थितियों में अपनी कानूनी शिक्षा पूरी की और दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद नीति के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाई। उन्होंने उस काले दौर में नेल्सन मंडेला जैसे महान नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों के पक्ष में कई ऐतिहासिक कानूनी लड़ाइयां लड़ीं। अपनी असाधारण योग्यता के बल पर वे आगे चलकर दक्षिण अफ्रीका के उच्च न्यायालय (High Court) में जज बनने वाली पहली अश्वेत महिला बनीं। इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रवांडा क्रिमिनल ट्रिब्यूनल, इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) और संयुक्त राष्ट्र (UN) में मानवाधिकार उच्च आयुक्त जैसी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां बखूबी निभाईं। Nobel Prize Winner 2026 क्यों मिला नावी पिल्लई को यह ऐतिहासिक सम्मान?नोबेल समिति ने उनके चयन के पीछे कई बड़े और दूरगामी परिणामों वाले कारणों को रेखांकित किया है, जो इस प्रकार हैं:युद्ध अपराधों और नरसंहार के खिलाफ कानूनी शिकंजा: पिल्लई ने अपने पूरे कार्यकाल के दौरान यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि युद्ध अपराधों, मानवता के विरुद्ध किए गए अपराधों और नरसंहार के दोषियों को किसी भी कीमत पर कानूनी सजा मिले। उन्होंने न्याय प्रणाली को इतना मजबूत करने पर जोर दिया कि ताकतवर शासक भी कानून के दायरे से बाहर न जा सकें।रवांडा नरसंहार में ऐतिहासिक न्यायिक भूमिका: रवांडा के अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण (ICTR) में जज के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने ऐसे कड़े और दूरदर्शी फैसले दिए, जिन्होंने यौन हिंसा और बलात्कार को युद्ध के दौरान 'मानवता के खिलाफ अपराध' और नरसंहार के एक हथियार के रूप रूप में मान्यता दिलाने में मील का पत्थर साबित किया।घृणा और उकसावे के खिलाफ वैधानिक लड़ाई: उनके कार्यक्षेत्र का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि उन्होंने उन लोगों और प्रचार तंत्रों पर कानूनी कार्रवाई को बढ़ावा दिया जो मीडिया, भाषणों या अन्य माध्यमों से आम जनता को नरसंहार के लिए भड़काते या उकसाते हैं।कमजोर वर्गों और पीड़ितों को न्याय: उन्होंने अपने फैसलों और रिपोर्टों के माध्यम से हमेशा यह साबित किया कि जब तक पीड़ित पक्षों को आधिकारिक और निष्पक्ष न्याय नहीं मिलता, तब तक समाज में स्थाई शांति की कल्पना नहीं की जा सकती।'शांति' और 'न्याय' के बीच का गहरा तालमेलअक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि एक जज और मानवाधिकार वकील को शांति पुरस्कार से क्यों सम्मानित किया गया? इसका स्पष्ट उत्तर नोबेल समिति के उस दृष्टिकोण में छिपा है जिसके अनुसार, सच्ची और स्थाई शांति केवल हथियारों के बल पर या शक्तिशाली देशों के राजनीतिक समझौतों से कायम नहीं हो सकती। जब तक समाज में न्याय, जवाबदेही और कानून का डर नहीं होगा, तब तक हिंसा और युद्ध की विभीषिका समाप्त नहीं हो सकती। नावी पिल्लई ने अपने पूरे जीवन में इसी सिद्धांत को चरितार्थ किया है।ये भी पढ़ें- पेट्रोल 5 और डीजल 3 रुपए प्रति लीटर महंगा, जाने नए रेटवर्तमान समय में जब दुनिया के विभिन्न हिस्सों (जैसे गाजा और अन्य संघर्ष क्षेत्रों) में मानवाधिकारों के हनन और सैन्य कार्रवाइयों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं, ऐसे दौर में नावी पिल्लई को यह सम्मान मिलना यह संदेश देता है कि अंतरराष्ट्रीय कानून और न्याय की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। यह पुरस्कार केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं है, बल्कि यह उन तमाम लोगों की जीत है जो दुनिया के किसी भी कोने में अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं।

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कहां पकड़ा गया वायुसेना का फर्जी अधिकारी? वर्दी का किया गलत इस्तेमाल

हैदराबाद |Vivek
कहां पकड़ा गया वायुसेना का फर्जी अधिकारी? वर्दी का किया गलत इस्तेमाल

देश की सुरक्षा और सेना की गरिमा से खिलवाड़ करने वाले एक चौंकाने वाले मामले का खुलासा हुआ है। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में भारतीय वायुसेना (IAF) का फर्जी अधिकारी बनकर घूम रहे एक युवक को सैन्य सुरक्षा कर्मियों और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई के दौरान धर दबोचा। आरोपी न केवल सैन्य छावनी क्षेत्र में अवैध रूप से दाखिल हुआ था, बल्कि वह एयरफोर्स की वर्दी का दुरुपयोग कर सोशल मीडिया पर अपनी फर्जी धौंस जमाने और युवतियों को प्रभावित करने की साजिश रच रहा था। यह घटना शहर के संवेदनशील माने जाने वाले सिकंदराबाद स्थित परेड ग्राउंड में सामने आई, जिसके बाद से सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है।इस तरह हुआ फर्जीवाड़े का भंडाफोड़सिकंदराबाद के परेड ग्राउंड परिसर में सैन्य सुरक्षा कर्मियों की नजर एक युवक पर पड़ी जो भारतीय वायुसेना में 'फ्लाइंग ऑफिसर' की वर्दी पहनकर अत्यंत आत्मविश्वास के साथ घूम रहा था और मोबाइल से अपनी तस्वीरें खींच रहा था। ड्यूटी पर तैनात सतर्क सुरक्षाकर्मियों को उसकी चाल-ढाल, बॉडी लैंग्वेज और हरकतों पर कुछ संदेह हुआ। नियमों के तहत जब सैनिकों ने उसे रोककर उससे उसका परिचय पत्र और तैनाती स्थल के बारे में पूछताछ की, तो वह घबरा गया। उसके जवाबों में विरोधाभास देखकर सुरक्षाबलों का शक यकीन में बदल गया। कड़ाई से की गई शुरुआती पूछताछ में यह साफ हो गया कि वह व्यक्ति भारतीय वायुसेना का कोई आधिकारिक कर्मी नहीं है, बल्कि एक बहरूपिया है। इसके तुरंत बाद सैन्य सुरक्षा कर्मियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए उसे हिरासत में ले लिया और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए बेगमपेट पुलिस थाने के हवाले कर दिया।डिलीवरी एजेंट निकला आरोपी, बिहार का है मूल निवासीबेगमपेट पुलिस द्वारा की गई गहन पूछताछ में आरोपी की पहचान नीतेश कुमार पाल के रूप में हुई है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि नीतेश मूल रूप से बिहार का रहने वाला है और वर्तमान में हैदराबाद के ही नेरेडमेट इलाके में रह रहा था। चौंकाने वाली बात यह है कि उसका दूर-दूर तक सेना या किसी रक्षा सेवा से कोई लेना-देना नहीं है; बल्कि वह अपनी आजीविका चलाने के लिए पेशे से एक साधारण डिलीवरी एजेंट के रूप में काम करता है। पुलिस यह जानकर हैरान है कि एक साधारण डिलीवरी का काम करने वाला शख्स किस प्रकार इतनी आसानी से एयरफोर्स की आधिकारिक वर्दी और उसके प्रतीक चिह्न हासिल करने में कामयाब रहा। पुलिस अब उस लोकल टेलर या वेंडर की तलाश कर रही है जिसने उसे यह वर्दी सिलकर या उपलब्ध कराई थी, क्योंकि सेना की वर्दी का इस तरह अवैध रूप से बेचा जाना या बनवाया जाना गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय है। Fake Air Force Officer Hyderabad सोशल मीडिया पर रसूख और युवतियों को फंसाने का खेलपुलिस की साइबर विंग और जांच अधिकारियों द्वारा जब आरोपी के मोबाइल फोन और सोशल मीडिया खातों की खंगाली की गई, तो एक के बाद एक कई परतें उधड़ती चली गईं। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि नीतेश ने इंस्टाग्राम समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपनी प्रोफाइल को एक एयरफोर्स ऑफिसर के तौर पर पेश कर रखा था। उसने वर्दी पहने हुए कई तस्वीरें और रील्स अपलोड कर रखी थीं ताकि लोगों को उसकी असलियत पर कभी शक न हो।जांच एजेंसियों को इस बात का पुख्ता अंदेशा है कि वह इस फर्जी और मनगढ़ंत पहचान का इस्तेमाल सोशल मीडिया के जरिए युवतियों से दोस्ती करने, उन्हें अपने रुतबे के जाल में फंसाने और भावनात्मक रूप से गुमराह करने के लिए करता था। परेड ग्राउंड में विशेष तौर पर तस्वीरें खिंचवाने के पीछे उसका मुख्य उद्देश्य यही था कि वह उन तस्वीरों को अपनी प्रोफाइल पर अपलोड कर अपनी झूठी सैन्य पहचान को और अधिक मजबूत और विश्वसनीय दिखा सके। फिलहाल पुलिस इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि क्या उसने इस फर्जीवाड़े के जरिए पहले भी किसी को ठगा है या किसी युवती को अपने जाल में फंसाया है।ये भी पढ़ें- मैड संधू की हत्या मामले में एक्शन, एक शूटर गिरफ्तार, इस वजह से की थी हत्या ?पुलिस का शिकंजा और खंगाले जा रहे हैं नेटवर्कघटना की गंभीरता को देखते हुए बेगमपेट पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इस बात की भी सुई घुमा रही है कि इस अपराध में अकेले नीतेश का हाथ है या उसके पीछे कोई और गिरोह भी सक्रिय है जो इस तरह की अवैध गतिविधियों में लिप्त है।सोशल मीडिया डाटा रिकवरी: आरोपी के इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य चैटिंग ऐप्स के चैट्स को खंगाला जा रहा है ताकि उसके संपर्कों और संभावित पीड़ितों की पहचान की जा सके।वर्दी का स्रोत: एयरफोर्स की हूबहू वर्दी और रैंक बैज उसे कहां से और किसने उपलब्ध कराए, पुलिस इस एंगल से भी सप्लायर की तलाश कर रही है।अन्य सहयोगियों की तलाश: क्या इस साजिश में कोई अन्य स्थानीय व्यक्ति उसकी मदद कर रहा था, इसकी भी तस्दीक की जा रही है।सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य इलाकों में इस प्रकार की सेंधमारी और वर्दी का दुरुपयोग देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। पुलिस इस मामले के हर एक पहलू को टटोल रही है और जांच के अंत में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर कोर्ट में चालान पेश कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

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5 करोड़ देकर कोहली को प्रेमानंद महाराज से मिलने बुलाया? वायरल खबर कितनी सच ?

मथुरा-वृंदावन|Vivek
5 करोड़ देकर कोहली को प्रेमानंद महाराज से मिलने बुलाया? वायरल खबर कितनी सच ?

प्रेमानंद महाराज जी के शिष्य की मौत के बाद से अलग-अलग तरह की खबरें सामने आ रही हैं. एक ओर जहां इस केस के बाद से दर्शन बंद करने का फैसला लिया गया है. वहीं पुलिस मौत की असली वजह तक पहुंचने का काम कर रही है. ऐसे में अब इस मामले से जुड़ा एक ओर विवाद खड़ा हो गया है. टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली को लेकर गावा किया गया कि विराट कोहली और अनुष्का शर्मा को 5 करोड़ देकर प्रेमानंद महाराज के आश्रम में बुलाया गया था. जिसको लेकर अनेक खबरें सामने आई और लोगों ने कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने रखी. दरअसल, फलाहारी महाराज दिनेश शर्मा की ओर से ये स्पष्ट शब्दों में ये दावा किया गया था और कहा गया था कि 5 करोड़ रुपए देकर विराट कोहली औऱ अनुष्का शर्मा को प्रेमानंद महाराज के आश्रम में बुलाया गया था. जिसके बाद देश में इस मुद्दे को लेकर विरोध छीड़ गया.मामले में विराट कोहली की तरफ से क्या कहा गयामामले ने तूल पकड़ा तो अब विराट कोहली के प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान जारी किया और सभी दावों को सिरे से खारिज किया. प्रवक्ता ने कहा कि फलाहारी महाराज दिनेश शर्मा की ओर से विराट कोहली को लेकर किए गए दावे पूरी तरह झूठे, निराधार और तथ्यात्मक रूप से गलत हैं. विराट कोहली की ओर से जारी इस बयान के बाद साफ है कि उनकी टीम इस मामले को लेकर किसी तरह की गलतफहमी या अटकल को आगे बढ़ते नहीं देखना चाहती. प्रवक्ता ने मीडिया से भी अपील की है कि किसी भी ऐसे बयान को प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले उसकी तथ्यात्मक जांच जरूर की जाए.विराट कोहली के प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान Kohli Spokesperson Statement 'हम स्पष्ट रूप से कहना चाहते हैं कि फलाहारी महाराज दिनेश शर्मा द्वारा श्री विराट कोहली के संबंध में किए गए दावे पूरी तरह झूठे, निराधार और तथ्यात्मक रूप से गलत हैं.' वहीं इस मामले में आश्रम से जुड़े एक शिष्य ने भी फलाहारी महाराज दिनेश शर्मा के दावे को बेबुनियाद बताया था. और अब विराट कोहली के प्रवक्ता ने भी फलाहारी महाराज दिनेश शर्मा के इस दावे को पूरी तरह झूठा, निराधार और तथ्यात्मक रूप से गलत करार दिया.आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा कई मौकों पर प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंच चुके हैं. इन मुलाकातों की तस्वीरें और वीडियो भी सामने आते रहे हैं. दोनों ने कई बार प्रेमानंद महाराज जी से सवाल भी किए हैं. प्रवक्ता के मुताबिक, विराट कोहली प्रेमानंद महाराज जी के पास पूरी तरह अपनी गहरी आस्था और श्रद्धा के कारण जाते हैं.ये भी पढ़ें- प्रेमानंद महाराज के आश्रम में बदले नियम, अब दर्शन करने पर भी पड़ेगा असरसेलिब्रिटीज की आस्था और व्यक्तिगत जीवनविराट कोहली और अनुष्का शर्मा अपनी धार्मिक और आध्यात्मिक आस्था के लिए जाने जाते हैं। वे अक्सर देश के विभिन्न मंदिरों, आश्रमों और आध्यात्मिक गुरुओं के दर्शन करने जाते हैं। वृंदावन के लोकप्रिय संत प्रेमानंद महाराज जी के प्रति उनकी गहरी श्रद्धा जगजाहिर है। जब कोई सेलिब्रिटी अपनी मर्जी से किसी आध्यात्मिक गुरु से मिलने जाता है, तो उसे पैसों के लेन-देन या किसी सौदेबाजी से जोड़ना सरासर गलत और अनैतिक है। ऐसे बेबुनियाद आरोप न सिर्फ किसी की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक संस्थाओं की गरिमा पर भी सवाल खड़े करते हैं।वहीं संत प्रेमानंद महाराज के साधक रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत के मामले में परिवार ने कई सवाल उठाए हैं। परिवार का कहना है कि दीपक आत्महत्या नहीं कर सकता था। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। बेटे की मौत की सूचना पर पहुंचीं रसिक की मां लौंग बाई ने कहा- दो साल पहले बेटे से आखिरी बार बात हुई थी। सूचना मिली कि बेटा गिर गया है। हम आनन-फानन में यहां आए। पहले भी मिलने आए थे, लेकिन मुलाकात नहीं होने दी गई थी। भगवान दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।

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