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UPI की जगह फिर लौटेगा कैश का जमाना? जाने क्या हो सकती है वजह ?

UPI पेमेंट और MDR चार्ज के नए नियमों से डिजिटल भुगतान और कैश लेनदेन पर असर की तस्वीर

UPI पेमेंट और MDR चार्ज के नए नियमों से डिजिटल भुगतान और कैश लेनदेन पर असर की तस्वीर

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Vivekनई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2026, (अपडेटेड 07:06 am)

UPI नियमों में हाल ही में सरकार की ओऱ से कई बदलाव हुए हैं. जिसको लेकर दुकानदारों और ग्राहकों में कई तरह की उलझन पैदा हो गई है. ऐसे में हो सकता है कि आम जनता आने वाले समय में यूपीआई की जगह कैश का फिर से इस्तेमाल करना शुरू कर दे क्योंकि अभी तक UPI के जरिए किसी तरह का अन्य टैक्स देना नहीं पड़ता था. लेकिन अब सरकार ने जो नियम बदले हैं उसके तहत दुकानदारों पर अन्य आर्थिक बोझ पड़ेगा. जिसका असर आम जनता पर भी पड़ सकता है. ऐसे में त्योहारों में पैसों का लेन-देन ज्यादा होने वाला है. जिसका सीधा असर व्यापार पड़ेगा.

क्या है नई व्यवस्था ?

नई व्यवस्था के तहत ₹2,000 से ज्यादा के मर्चेंट UPI पेमेंट पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होगा. जिसको लेकर सरकार की ओर से निर्देश जारी हुए हैं. हालांकि, सरकार की ओर से ये भी साफ कर दिया गया है कि जो अतिरिक्त शुल्क लगेगा वो ग्राहक से नहीं लिया जाएगा. लेकिन दूसरी ओर दुकानदारों का कहना है कि वो अगर अतिरिक्त शुल्क देते हैं तो उन्हें आर्थिक नुकसान होगा.

15 October UPI Rule
15 October UPI Rule
बड़ा सवाल-अब क्या होगा ?

अगर कोई ग्राहक मान लीजिए की 5 हजार का सामान खरीदने पर UPI का इस्तेमाल करता है तो उससे दुकानदार 20 रुपए ओर मांग सकता है. अगर ग्राहक ऐसा नहीं करता है तो हो सकता है दुकानदार उसे कैश में पेमेंट करने को कहे. अगर ऐसी स्थिति बनती है तो यकीनन ही ग्राहक और दुकानदार के बीच लेन-देन प्रभावित होगा.

क्या कहती हैं सर्वे की रिपोर्ट ?

नए नियमों को लेकर कई सर्वे हुए हैं, ऐसे में लोकलसर्कल्स सर्वे के कुछ आंकड़े भी सामने आए हैं. जिसमें कहा गया है कि लोग अब बड़ी संख्या में UPI का इस्तेमाल करने की बजाय कैश से लेन-देन करेंगे. लोगों ने कैश, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या बैंक ट्रांसफर जैसे माध्यमों पर जाने की बात कही. वहीं आंकड़ों के मुताबिक केवल 14 प्रतिशित लोगों का ही कहना है कि अगर 2 हजार से ज्यादा भुगतान करने पर उन्हें अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है तो खुद ही देंगे. लेकिन वहीं दूसरी ओर 76 प्रतिशित लोगों ने कहा है कि वो दूसरे माध्यमों के जरिए ही भुगतान करना सही समझेंगे.

दुकानदारों ने नए नियमों को लेकर क्या कहा ?

वहीं लोकलसर्कल्स सर्वे के आंकड़ों में दुकानदारों ने भी अपना पक्ष रखा है सिर्फ 17 प्रतिशित दुकानदारों ने कहा कि वे 0.4% MDR का बोझ खुद उठाने को तैयार हैं. 41% ने कहा कि वे कोई MDR नहीं देंगे, जबकि 9% ऐसे थे जो UPI स्वीकार ही नहीं करते. 15% कारोबारी सिर्फ 0.04% तक MDR खर्च उठाने को तैयार थे. इसका मतलब यह नहीं है कि 83% दुकानदार निश्चित तौर पर ग्राहक से पैसा वसूलेंगे. लेकिन सर्वे यह जरूर दिखाता है कि 0.4% MDR का खर्च खुद उठाने को लेकर कारोबारियों में सहमति सीमित है.

कब से जारी होंगे नए नियम ?

हालांकि, सरकार की ओर से जारी नए नियम 15 अक्टूबर से लागू होंगे. लेकिन उससे पहले ही दुकानदारों में चिंता का माहौल साफ देखा जा रहा है. क्योंकि अभी तक उन्हें यूपीआई पेमेंट के जरिए किसी तरह का अन्य शुल्क नहीं देना पड़ रहा है. नई व्यवस्था सिर्फ पर्सन-टू-मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए है. अगर आप अपने परिवार के किसी सदस्य या दोस्तों को UPI से पैसे भेजते हैं, तो उस पर कोई चार्ज नहीं लगेगा. QR के जरिए महीने में एक लाख रुपए तक पेमेंट रिसीव करने वाले दुकानदार भी इस व्यवस्था से बाहर हैं. जिसका मतलब है कि बड़े व्यापारियों और दुकानदारों पर इसका असर प्रभाव देखने को मिल सकता है.

15 October UPI Rule
15 October UPI Rule
छोटे कारोबारियों और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव

डिजिटल पेमेंट भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है, जहां छोटे से लेकर बड़े व्यापारी तक हर लेन-देन के लिए क्यूआर कोड का उपयोग करते हैं। ऐसे में नए नियमों के लागू होने से छोटे दुकानदारों की चिंताएं स्वाभाविक रूप से बढ़ गई हैं। पिछले कुछ सालों में भारत ने कैशलेस इकॉनमी की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए हैं, लेकिन नए शुल्कों के जुड़ने से यह सफर थोड़ा प्रभावित हो सकता है। जानकारों का मानना है कि यदि इस मामले में नीति निर्माताओं और व्यापारियों के बीच कोई बीच का रास्ता नहीं निकाला गया, तो यह बदलाव डिजिटल क्रांति की गति को धीमा कर सकता है।
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त्योहारी सीजन में बाजार की चाल पर टिकी हैं निगाहें

हर साल त्योहारी सीजन के दौरान बाजारों में करोड़ों-अरबों रुपयों का कारोबार होता है। इस बार 15 अक्टूबर से नए नियम प्रभावी होने के कारण व्यापारियों के मन में यह आशंका है कि कहीं त्योहारी सीजन की व्यस्तता के दौरान ग्राहकों और दुकानदारों के बीच भुगतान को लेकर तनाव न बढ़ जाए। ग्राहक आमतौर पर सुविधा और पारदर्शिता को प्राथमिकता देते हैं, और यदि उन्हें अतिरिक्त शुल्कों या झंझटों का सामना करना पड़ा, तो वे पारंपरिक नकद लेनदेन या अन्य पारंपरिक विकल्पों की ओर वापस लौटने में संकोच नहीं करेंगे। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में सरकार या वित्तीय संस्थान इस चुनौती से निपटने के लिए क्या नए कदम उठाते हैं.


Vivek

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