वोट बैंक पर नहीं, समाज सेवा पर ध्यान दें कार्यकर्ता- पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वाराणसी से वडनगर जा रहे सेवा यात्रियों से बातचीत की और अपने विचार साझा किए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वाराणसी से वडनगर और वडनगर से वाराणसी जा रहे सेवा यात्रियों (बाइकर्स) के साथ एक विस्तृत और प्रेरणादायक संवाद किया। इस दौरान पीएम मोदी ने महात्मा गांधी के जीवन और उनके विचारों का स्मरण करते हुए देश की राजनीति, समाज सुधार और सेवा भाव पर खुलकर अपने विचार रखे। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि हमें केवल वोटबैंक की राजनीति के दायरे से ऊपर उठकर समाज में निरंतर सुधार और सकारात्मक परिवर्तन के लिए हमेशा काम करते रहना चाहिए। यह पूरा संवाद और सेवा यात्राएं प्रधानमंत्री के 25 साल के बेदाग और सफल सार्वजनिक जीवन को समर्पित हैं।
सेवा यात्राओं और बाइक रैलियों का अनूठा सफर
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन यानी 17 सितंबर को देश भर में कई विशेष आयोजनों की शुरुआत हुई थी। इसी कड़ी में दो भव्य बाइक रैलियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया था। इनमें से एक रैली पीएम मोदी के जन्मस्थान वडनगर से वाराणसी और दूसरी रैली वाराणसी से वडनगर के लिए निकाली गई है।
इन दोनों लंबी और ऐतिहासिक यात्राओं का समापन 7 अक्टूबर को होगा। इन यात्राओं का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्षों के लंबे सार्वजनिक जीवन और उनके द्वारा किए गए जनहित के कार्यों को रेखांकित करना है। इस अभियान में देश के विभिन्न हिस्सों से आए युवा बाइकर ग्रुप हिस्सा ले रहे हैं।
पीएम मोदी की बातचीत की 5 बड़ी और खास बातें
सेवा यात्रियों के साथ संवाद के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने अनुभवों को साझा किया और कई महत्वपूर्ण बातें कहीं, जो इस प्रकार हैं:
गांवों और शहरों के बीच की खाई हुई कम: पीएम मोदी ने कहा कि बीते 12 वर्षों के दौरान भारत में शहरों और गांवों के बीच जो विकास का गैप या दूरी हुआ करती थी, वह अब काफी हद तक कम हो चुकी है। आज देश के ग्रामीण इलाकों में भी आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विकसित हुआ है, जिससे हमारी बहनों और बेटियों के जीवन में आत्मनिर्भरता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।
वडनगर से काशी तक का जुड़ाव: प्रधानमंत्री ने कहा कि कल उन्हें वडनगर से निकले सेवा यात्रियों की सभी टोलियों से बात करने का अवसर मिला और आज काशी से उनके पैतृक गांव जा रहे यात्रियों से संवाद का मौका मिला। वडनगर ने उन्हें जीवन के बुनियादी संस्कार दिए हैं, जबकि काशी ने उनके उन संस्कारों में जनसेवा के अनगिनत रंग भर दिए हैं।
सेवा यात्राओं का व्यक्तिगत अनुभव: पीएम मोदी ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि इन सेवा यात्राओं ने उनके व्यक्तिगत जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत का शायद ही कोई ऐसा जिला बचा होगा, जहां उन्हें जाने का अवसर न मिला हो। ऐसे अनगिनत जिले हैं जहां उन्होंने रातें भी बिताई हैं। हर यात्रा और रास्ते में मिले अनुभव आज भी एक गुरु की तरह उनका सही मार्गदर्शन करते हैं।
चरैवति-चरैवति का संदेश: बातचीत के दौरान उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्म-जयंती का जिक्र करते हुए कहा कि पंडित दीनदयाल जी हमेशा हमें 'चरैवति-चरैवति' (यानी लगातार चलते रहने) का संदेश देते रहे हैं। वे खुद भी जीवन भर निरंतर यात्रा करते रहे। एक सच्चे सेवा यात्री के रूप में लगातार चलते रहना ही हमारा मुख्य लक्ष्य होना चाहिए।
पुण्य साझा करने की बात: बाइकर्स से बातचीत के दौरान पीएम ने एक पुरानी और प्रेरक कहावत का हवाला देते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति लंबी यात्रा से लौटता है और आप उसे नमन करते हैं, तो उस यात्रा का आधा आध्यात्मिक पुण्य उस व्यक्ति को भी मिलता है जो उसका सम्मान करता है। इसलिए वे इन सभी सेवा यात्रियों को नमन करके उस पुण्य का आधा हिस्सा ग्रहण कर रहे हैं।
1300 किलोमीटर लंबी बाइक रैली और 'आशीर्वाद का दीया'
यह बाइक यात्राएं महज़ एक सफर नहीं हैं, बल्कि यह देश के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकीकरण का प्रतीक हैं। वडनगर से वाराणसी के बीच की यह दूरी करीब 1300 किलोमीटर की है, जिसे 10 अलग-अलग ग्रुप्स में बंटे बाइक सवार तय कर रहे हैं।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर पूरे देश में ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के तहत भव्य दीपोत्सव का आयोजन किया गया था। कई राज्यों में नागरिकों ने अपने घरों और सार्वजनिक स्थलों पर दीये जलाकर उनके दीर्घायु होने की कामना की। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने प्रसिद्ध कांकरिया झील पर महाआरती में हिस्सा लिया था। गृह मंत्री अमित शाह ने वडनगर में आयोजित कार्यक्रम में कहा था कि नरेंद्र मोदी आज दुनिया के सबसे लोकप्रिय और दूरदर्शी नेताओं में शुमार हैं।
About the Author: Vivek
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