कॉफी पीने वालों के लिए अच्छी खबर, कैंसर से बच सकते हैं आप

कॉफी पीने के फायदे और लिवर कैंसर के खतरे को कम करने वाली रिसर्च की तस्वीर
दुनिया में अधिकतर लोग कॉफी पीने के शौकीन होते हैं. लेकिन वो ये नहीं जान पाते हैं कि कॉफी पीने से उनकी सेहत पर कैसा असर पड़ता है? एक रिपोर्ट में इससे जुड़े खुलासे हुए हैं जिसको सुनने के बाद कॉफी पीने वाले लोगों को कुछ हद तक राहत मिल सकती है. क्योंकि उन्हें जाने-अनजाने में कॉफी से कई फायदे हो रहे हैं. दावा इस बात को लेकर है कि कॉफी पीने के बाद उन्हें कैंसर का खतरा कम हो सकता है.
क्या कहती है स्टडी ?
तीन लाख से ज्यादा उन लोगों पर करीब 13 साल तक मेडिकल स्टडी की गई जो रोजाना सीमित कॉफी का सेवन करते हैं. ऐसे में लोगों में पाया गया कि उनका लिवर काफी हेल्दी रहता है जो कि लिवर कैंसर के रिस्क को भी कम सकता है. इस रिपोर्ट में कॉफी पीने की सही सीमा भी बताई गई है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसको लेकर अमेरिकन गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिकल एसोसिएशन ने रिसर्च की है और के स क्लिनिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी एंड हेपेटोलॉजी जर्नल में इसे प्रकाशित किया गया है.
लाखों लोगों को 13 साल तक किया ट्रैक
वैज्ञानिकों की ओर से तीन से ज्यादा लोगों को 13 सालों तक ट्रैक किया गया है और खान पीन के साथ ही उनकी कॉफी पीने की सीमा को भी प्रमुखता से ध्यान में रखा गया. रिसर्च में सामने आया है कि जो लोग रोजाना कॉफी पीते हैं उनमें लिवर सिरोसिस का खतरा बहुत कम होता है साथ ही शोधकर्ताओं ने ये भी देखा कि कॉफी पीने वालों में सबसे गंभीर लिवर कैंसर यानी हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा (HCC) और लिवर से जुड़े डेथ रेट में साफ गिरावट दर्ज की गई. रिसर्च के तहत सभी लोगों के लिवर का MRI भी किया जिसमें पाया गया कि उनके लिवर में जमा चर्बीऔर अंदरूनी सूजन व फाइब्रोसिस काफी कम पाई गई. सबसे रोचक बात यह रही कि ये असर सिर्फ सामान्य कैफीन वाली कॉफी में ही नहीं, बल्कि डिकैफ यानी बिना कैफीन वाली कॉफी में भी देखा गया.
कितनी मात्रा में कॉफी का करना चाहिए सेवन
रिसर्च के मुताबिक कॉफी पीने की मात्रा हर किसी शख्स की अलग होती है. बात अगर एडल्ट लोगों की करें तो उनके लिए दो से तीन सामान्य कॉफी के कप ठीक होते हैं. एक दिन में कुल कैफीन की मात्रा 400 मिलीग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए. 2-3 कप कॉफी इस दायरे में आराम से आ जाती है. इस बीच इस बात का ध्यान जरूर रखा जाए कि ये एक ऑब्जर्वेशनल स्टडी है. इसका अर्थ ये नहीं है कि कॉफी कभी कैंसर नहीं होने देगी.ज्यादा कैफीन लेने से दिल की धड़कन तेज, नींद कम आना और पेट पर असर भी हो है. ऐसे में कुछ लोगों को इसको डॉक्टर की सलाह से ही पीना चाहिए.
किन लोगों को कॉफी पीने से बचना चाहिए ?
- गर्भवती महिलाएं - गर्भवती महिलाओं को कॉफी पीने से बचना चाहिए और अगर पीने का मन भी है तो वो अपने डॉक्टर से इस बार में जरूर सलाह लें ताकि किसी तरह की गंभीर बीमारी से बचा जा सके.
- नींद की समस्या वाले लोग- कई लोगों को नींद आने की समस्या होती है ऐसे में उन लोगों को भी कॉफी पीने से बचना चाहिए क्योंकि कॉफी में कैफीन होता है जिसके चलते उन्हें नींद ना आने की समस्या ओर भी बढ़ सकती है.
- पेट की समस्या वाले ध्यान दें- उन लोगों को भी कॉफी पीनी नहीं चाहिए जिनके पेट में कोई समस्या है क्योंकि कॉफी पीने से उनकी समस्या ओर बढ़ सकती है.
- कॉफी से एलर्जी- कई लोगों को कॉफी पीने से एलर्जी भी होती है. ऐसे में उन लोगों को कॉफी बिल्कुल भी नहीं पीनी चाहिए क्योंकि ऐसा करने से उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है.
संतुलित जीवनशैली और एंटीऑक्सीडेंट्स का महत्व
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कॉफी पर निर्भर रहने से संपूर्ण स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल सकता, बल्कि इसके साथ एक संतुलित जीवनशैली और पौष्टिक आहार का होना बेहद जरूरी है। कॉफी में प्राकृतिक रूप से कई प्रकार के शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स और पॉलीफेनोल्स पाए जाते हैं, जो शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाने और सूजन को कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं। जब हम इसे एक निश्चित और सीमित मात्रा में पीते हैं, तो यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को भी सुचारू रूप से चलाने में मदद करती है। हालांकि, इसमें मिलाई जाने वाली चीनी और अत्यधिक दूध इसके फायदों को कम कर सकते हैं, इसलिए इसे ब्लैक कॉफी या बहुत कम दूध-चीनी के साथ पीना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।
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आधुनिक शोध और भविष्य की मेडिकल संभावनाएं
चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में इस प्रकार की स्टडीज इस बात को समझने में मदद करती हैं कि हमारे रोजाना के खान-पान की आदतें किस प्रकार गंभीर बीमारियों के खतरे को कम कर सकती हैं। लिवर स्वास्थ्य के अलावा, अन्य वैज्ञानिक शोधों में यह भी संकेत मिले हैं कि कॉफी का सीमित सेवन टाइप-2 डायबिटीज और कुछ न्यूरोलॉजिकल विकारों के जोखिम को भी कम कर सकता है। फिर भी, किसी भी निष्कर्ष को अंतिम सत्य मानने के बजाय शरीर की व्यक्तिगत तासीर और डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता देना ही समझदारी है.
About the Author: Vivek
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