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'भारत सरकार के खाते में नहीं जाएगा पैसा',वित्त मंत्री ने ऐसा क्यों कहा ?

Finance Minister Nirmala Sitharaman statement on UPI MDR charges, merchant discount rate, government tax clarification and digital payment rules.

Finance Minister Nirmala Sitharaman statement on UPI MDR charges, merchant discount rate, government tax clarification and digital payment rules.

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Vivekनई दिल्ली, 25 सितंबर 2026, (अपडेटेड 05:25 am)

 देश में डिजिटल पेमेंट और यूपीआई (UPI) के इस्तेमाल को लेकर हाल ही में छिड़ी बहस के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बड़ा और स्पष्ट बयान दिया है। अक्सर राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर यूपीआई ट्रांजैक्शन से जुड़े शुल्कों को लेकर कई तरह की भ्रामक बातें फैलाई जाती हैं, जिन्हें खारिज करते हुए वित्त मंत्री ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर जो चर्चाएं चल रही हैं, उससे मिलने वाला पैसा किसी भी सूरत में भारत सरकार के खाते या राजकोष में नहीं जाता है। सरकार की इस स्पष्टीकरण के बाद डिजिटल ट्रांजैक्शन से जुड़े कई बड़े भ्रम दूर होने की उम्मीद है।

क्या है एमडीआर (MDR) और सरकार की क्या है भूमिका?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विस्तार से समझाते हुए कहा कि सबसे पहले लोगों को यह समझने की जरूरत है कि एमडीआर शुल्क (Merchant Discount Rate) सरकार द्वारा लगाया गया कोई नया टैक्स, सेस या किसी प्रकार का सरचार्ज नहीं है। उन्होंने बहुत ही साफ लहजे में स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से एक व्यावसायिक और तकनीकी शुल्क है, जो एनपीसीआई (NPCI), पेमेंट एग्रीगेटर्स, अलग-अलग डिजिटल सेवा प्रदाताओं, पॉइंट ऑफ सेल (POS) मशीन उपलब्ध कराने वाली कंपनियों और मर्चेंट बैंकों द्वारा वसूला जाता है।

सरकार का इस शुल्क की उगाही से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। यह तकनीकी बुनियादी ढांचे को मेंटेन रखने और डिजिटल भुगतान प्रणाली को सुचारू रूप से चलाने वाले संस्थानों के बीच का एक पेशेवर वित्तीय लेनदेन है। विपक्ष या अन्य माध्यमों से जो यह बात फैलाई जा रही है कि सरकार इस पैसे को इकट्ठा कर रही है, वह पूरी तरह से निराधार और तथ्यात्मक रूप से गलत है।

2,000 रुपये से अधिक के भुगतान और व्यापारियों पर स्थिति

इस पूरे विवाद के केंद्र में यह सवाल भी था कि आखिर इस शुल्क का बोझ किसे उठाना पड़ेगा। इस पर वित्त मंत्री ने आश्वस्त किया कि 2,000 रुपये से अधिक के डिजिटल भुगतान पर यदि कोई एमडीआर शुल्क लागू होता भी है, तो उसका सीधा भुगतान केवल व्यापारी (Merchant) द्वारा किया जाएगा। इसका बोझ देश के आम उपभोक्ताओं या ग्राहकों की जेब पर बिल्कुल नहीं डाला जाएगा।

वित्त मंत्री ने तर्क दिया कि व्यापारी वर्ग पहले से ही क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या अन्य पारंपरिक डिजिटल पेमेंट माध्यमों के जरिए होने वाले लेनदेन पर इस तरह के शुल्कों का भुगतान करते आए हैं। इसके बावजूद वे उन मामलों में भी इस शुल्क का बोझ ग्राहकों पर नहीं डालते हैं। उन्होंने कहा कि व्यापारी अपने बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए ग्राहकों को विभिन्न प्रकार के ऑफर, डिस्काउंट या कैशबैक देकर इस लागत को मैनेज करते हैं। इसलिए ग्राहकों को इस बात को लेकर किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सरकार ने पहले ही यह सुनिश्चित किया है कि आम जनता पर इसका कोई अतिरिक्त वित्तीय दबाव न पड़े।

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विपक्ष के आरोपों पर वित्त मंत्री का तीखा पलटवार

प्रेस और मीडिया के माध्यम से इस मुद्दे पर राजनीति कर रहे विपक्षी दलों पर भी वित्त मंत्री ने कड़ा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास इन दिनों सरकार को घेरने के लिए कोई ठोस और वास्तविक मुद्दे नहीं बचे हैं, इसलिए वे हर छोटी-तांत्रिक बात को तूल देकर जनता के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

निर्मला सीतारमण ने विपक्ष के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें यह कहा जा रहा था कि सरकार ने किसी दबाव में आकर या खुद यह फैसला लिया है। उन्होंने दो टूक कहा कि यह एनपीसीआई, पेमेंट बैंकों और मर्चेंट बैंकरों के बीच का एक आंतरिक और पेशेवर व्यावसायिक फैसला है, जिसे बेवजह राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। विपक्ष जनता को यह विश्वास दिलाने का प्रयास कर रहा है कि सरकार आम लोगों की जेब काटने की तैयारी कर रही है, जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है।

डिजिटल इकोनॉमी और पारदर्शिता का संदेश

वित्त मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट मार्केट बन चुका है। सरकार का मुख्य उद्देश्य देश के हर कोने में कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है, और इसके लिए यूपीआई जैसे प्लेटफॉर्म्स को सुरक्षित और मजबूत बनाना जरूरी है। इस पूरी प्रक्रिया में तकनीकी संस्थाओं और बैंकों के अपने ऑपरेशनल खर्च होते हैं, जिन्हें पूरा करने के लिए नियमों के तहत व्यवस्थाएं तय की जाती हैं। वित्त मंत्री के इस बयान के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार डिजिटल भुगतान को लेकर पूरी तरह से पारदर्शी रुख अपनाए हुए है और आम नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

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