ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने से सुप्रीम कोर्ट ने किया मना, कही ये बड़ी बात

Supreme Court refuses to suspend CEC Gyanesh Kumar over unilateral decisions, issues notice to ECI on collective decision-making petition.
इन दिनों मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार विवादों से घिरे हुए हैं. कई राजनीतिक दलों ने उनकी कार्यशैली पर सवाल खड़ा किए हैं. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने के लिए कोई अंतरिम आदेश जारी करने से मना कर दिया है. दरअसल, मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप है कि उन्होंने भारत के चुनाव आयोग में बाकी दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना ही एकतरफा फैसले लिए हैं. इस मामले में CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने आरोपों पर भारत के चुनाव आयोग से जवाब तलब किया है.
सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बात
अदालत ने अपने सख्त संकेतों में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि आयोग का जवाब सामने आने के बाद यह साबित होता है कि CEC द्वारा लिए गए फैसले बिना किसी ज़रूरी आम सहमति या बहुमत के लिए गए थे, तो शीर्ष अदालत उन फैसलों की समीक्षा कर सकती है और उन्हें वापस लेने या पलटने का कड़ा कदम भी उठा सकती है।
सामूहिक निर्णय लेने की व्यवस्था और संविधान का अनुच्छेद 324
इस संबंध में दाखिल की गई जनहित याचिका में यह प्रमुख मांग की गई थी कि निर्वाचन आयोग के आंतरिक कामकाज में सामूहिक निर्णय की प्रक्रिया को (Collective Decision-Making Process) को पूरी सख्ती के साथ लागू किया जाए। इसके साथ ही याचिका में 'क्वो वारंटो' (Quo Warranto) रिट जारी करने का भी अनुरोध किया गया था, ताकि यह कानूनी रूप से स्पष्ट किया जा सके कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने किस संवैधानिक अधिकार के तहत कथित तौर पर अकेले ही आयोग के नाम पर इतने बड़े फैसले ले लिए।
याचिकाकर्ताओं ने अपने तर्कों के समर्थन में संविधान के अनुच्छेद 324 (Article 324 of the Indian Constitution) का हवाला देते हुए यह दलील दी कि देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की देखरेख, निर्देशन और नियंत्रण का विशेष अधिकार किसी एक अकेले मुख्य चुनाव आयुक्त का नहीं, बल्कि पूरे चुनाव आयोग (निकाय) का होता है। इसके अलावा, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम 2023 (Chief Election Commissioner and other Election Commissioners Act, 2023) की धारा 18 का भी विशेष तौर पर जिक्र किया गया, जिसमें स्पष्ट रूप से सामूहिक निर्णय लेने और मतभेद की स्थिति में बहुमत से फैसले लेने का वैधानिक प्रावधान तय किया गया है।
न्यूज़ रिपोर्ट्स और फाइल नोटिंग्स पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक टिप्पणी
इस हाई-प्रोफाइल कानूनी लड़ाई के दौरान याचिका में अन्य चुनाव आयुक्तों (जैसे सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी से जुड़ी समकालीन लिखित रिपोर्ट्स व फाइल नोटिंग्स) का हवाला दिया गया था। इन नोटिंग्स में अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच ECI के फैसलों पर कम से कम 14 कड़ी आपत्तियां दर्ज किए जाने का दावा किया गया था।
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हालांकि, Supreme Court ने बहुत स्पष्ट शब्दों में यह दो टूक टिप्पणी की कि अदालतें केवल मीडिया रिपोर्ट्स या अखबारों की खबरों के आधार पर इतने बड़े और दूरगामी परिणाम वाले संवैधानिक फैसले नहीं दे सकतीं। अदालत ने कानूनी साक्ष्यों और आधिकारिक दस्तावेजों को प्राथमिकता देने की बात कही है, जिससे यह साफ हो गया है कि इस मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही पूरी तरह से तथ्यों और आयोग के औपचारिक जवाब पर ही टिकी होगी।
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